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झूलती मीनार और अलबेला खत्री की डुबकी

प्रारंभ से पढेंअगली सुबह अलबेला खत्री जी से बात हुई तो उन्होने बताया कि वे एक दिन पहले अहमदाबाद में ही थे। फ़िर उन्होने कहा कि अगले दिन मैं सुबह की गाड़ी से अहमदाबाद आ रहा हूँ। वहीं मुलाकात हो जाएगी। मैने कहा कि अहमबाद स्टेशन पर आपको गाड़ी तैयार मिलेगी। मुझे फ़ोन कर देना, ड्रायवर आपको हमारे ठिकाने पर पहुंचा देगा। मेरी यह चर्चा अलबेला भाई से लोथल से लौटते वक्त हो रही थी। सुबह जब हम ऑफ़िस में पहुचे और उन्हे फ़ोन लगाया तो पता चला कि उनकी गाड़ी छुट गयी। उन्होने कहा कि जब शाम को आप सूरत पहुंचेगें तो मिलते हैं...

भुतहा रेस्ट हाउस--यात्रा बांधवगढ -- अंतिम भाग

वापसी की यात्रा पहाड़ से उतरने वाली थी। सभी धड़ल्ले से उतर रहे थे। सुमीत भी एक झटके में ही नीचे उतर आया। रास्ते में मुझे एक कोटपुतली राजस्थान के श्रद्धालु मिले। उनकी चुंदड़ी वाली पगड़ी देख कर उनसे कुछ बात चीत की। उन्होने बताया कि लगभग डेढ सौ साल पहले उनका परिवार कबीर साहब का अनुयायी बना था। तब से पीढी दर पीढी हम निभा रहे हैं। एक परिवार दार्जलिंग से आया हुआ था। इस परिवार के मुखिया देवमणि जी से मेरी कई किलोमीटर तक चर्चा हुई। उन्होने भी बताया कि लगभग 200 वर्षों से उनका परिवार कबीर पंथ का अनुयायी रहा है। इनके सा...

बांधवगढ के किले तक पदयात्रा --- यात्रा - 3

हमें पेंड्रारोड़ के पड़ाव को छोड़ना था और जाना था बांधवगढ की ओर। होटल पहुंच कर सामान उठाया चल पड़े मंजिल की ओर। वेंकट नगर से हमने मध्यप्रदेश में प्रवेश किया। अनूपपुर होते हुए शहडोल पहुंचे। रास्ते में चचाई पावर प्लांट के पास एक होटल में खाना खाया। उमरिया से बांधव गढ के लिए रास्ता है। 15 किलोमीटर की यह सड़क खराब है। रात को ढाई बजे हम ताला गांव याने बांधवगढ पहुंचे। यहां पहुंचने पर पता चला कि सभी रिजोर्ट और होटल फ़ुल चल रहे हैं। एक रिजोर्ट में गए तो उसने 2000 से कम कोई भी कमरा उपलब्ध नहीं है बताया। तब हमने उससे पू...

दो लड़कियाँ-और गांव का हाट-- यात्रा-2

content discovered on Thursday, June 23, 2011 in लल त शर म, ह ट ब ज र, मरव ह, प ड र र ड़, मह आ, ग व

शाम हो रही थी। शोण कुंड के पास ही साप्ताहिक हाट लगा हुआ था। छत्तीसगढ में सुदूर अंचल के गावों में साप्ताहिक हाट लगना सामान्य बात है। यहां पर लोग अपने रोजर्मरा के काम आने वाले सामान खरीद लेते है सप्ताह भर के लिए। वस्तु विनिमय भी हो जाता है। इन साप्ताहिक बाजारों का अपना ही महत्व है। पांच सात गावों के मुख्य गांव में यह बाजार लगते है। बाजार में आने वाले लोग अपने आस-पास के गावों में रहने वाले परिजनों से भी मिल लेते हैं। उनका हाल-चाल भी जान लेते है। कुछ समय साथ-साथ बिता लेते हैं। माँ को बेटी मिल जाती है। वह उसक...

मणिधारी सर्प और सोनकुंड से बांधवगढ की ओर - यात्...

content discovered on Tuesday, June 21, 2011 in मह आ, ब धवगढ, नर मद, श णभद र, मरव ह, लल त शर म

वर्षों की तमन्ना थी कि कभी बांधवगढ का किला देखा जाए। लेकिन वहाँ जाने का योग ही नहीं बन रहा था। 18 तारीख को सुबह सुमीत का फ़ोन आया कि-“ भैया बांधवगढ़ चलेंगे। मुझे मनचाही मुराद मिल गयी। मैने कहा कि-“कब चलना है? उसने बताया कि आज ही चलते हैं। मैं तुरंत तैयार हो गया। रात को लगभग 9 बजे हम लोग बांधवगढ की ओर चल पड़े। ड्रायवर को मिला कर हम तीन ही थे। पहला पड़ाव हमने पेंड्रारोड़ को बनाया। मैं तो खाना खाकर सो गया। पेंड्रारोड़ में हमने सुरभि लाज में रुम फ़ोन पर बुक कर लिया था। जब भी पेंड्रारोड़ आते हैं तो हम यहीं रुकते हैं।...

भेड़ाघाट और धुंवाधार पर पनिहारिन से भेंट

कालबेल बजने से सुबह हूई और खटिया की चाय पहुंच गई। समय देखा तो आठ बज रहे थे। मिसिर जी याद आ गए कि जल्दी तैयार होना है। गुरुदेव खुमारी में थे,लेकिन भेड़ाघाट और धुंवाधार दर्शन के लिए तैयार होना ही था। जो प्राकृतिक सौंदर्य किताबों में पढा और चित्रों में देखा उसे प्रत्यक्ष देखने का उत्साह था। हम फ़टाफ़ट तैयार हो गए। मेरा नाश्ता करने का मन नहीं था। सिर्फ़ गोरस लिया और अवधिया जी ने नाश्ता किया विजय सतपती जी के साथ। नाश्ता करते करते मिसिर जी का फ़ोन आ गया कि वे पहुंच रहे हैं। गिरीश दादा को लेकर आते हैं। लेकिन दुश्मनो...

जाबालिपुरम यात्रा-1

अथ राष्ट्रीय ब्लागर कार्यशाला जबलपुर कथा:-- जाबाला की नगरी जबलपुर जहां नित्य ही नर्मदे हर का उद्घोष होता है वहां ब्लागिंग पर राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन का संदेश मुझे समीर दादा और गिरीश दादा से प्राप्त हुआ। उस समय मैं अत्यावश्यक कार्य उत्तर भारत से दक्षिण भारत की यात्रा पर था। मैने वचन दिया कि किसी भी हालत में जिन्दा या मुर्दा कार्यशाला में शामिल होने के लिए समय पर पहुंच जाऊंगा। 29 तारीख की रात 15 दिनों की लगातार यात्रा के बाद घर पहुंचा और 30 तारीख की रात को अवधिया जी को साथ लेकर अमरकंटक एक्सप्रेस से जब...

 

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